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गाय का इंटरव्यू : जिस के पास है आपके सब सवालों का जवाब

Cow Interview: Lynching over Cow in India has become normal. Dozens of people have been killed over cow issues. आज हम इस गौ माता का इंटरव्यू लिए है| ये गाय मुसलमानों और दलितों के बारे में सब जानती है |

cow interview

अज हम MA, PHD करने के बावजुद भी बेरोज़गार है| अगर हम कम पढ़े लिखे होते तो शायद आज हमारा भी शुमार किसी साहूकार, सेठ या सियासी वो मिल्ली कायेदीन में होता | लेकिन कैसे वैसे पत्रकार बन गए | पत्रकारिता में आने का एक फायेदा ये तो हुआ की कभी कही हंगामी हालात में ये पत्रकारिता का रखा हुआ आईडी कार्ड बहोत कम आता है| उसे देख कर पुलिस अपने हाथ हम पर नहीं डालती और सुकून से रिपोर्टिंग करने देती है | कभी कभी यहीआईडी कार्ड सरकारी वर्करो को डराने में भी कम आजाता है|

अखबारात में आप बारहा पढ़े होगे सियासी नेताओं से लेकर काले-धन का कारोबार करने वाले बेव्परी के इंटरव्यू | लेकिन आप ने शायद ही कही पढ़ा होगा गौ माता का इंटरव्यू (cow interview) जो पीछले कुछ सालो से विवादों में है | हा हम उसी गय (cow) के बारे में बात कर रहे है जिस की वजा से कई मुसलमान और दलितों को अपनी जाने भी गवानी पढ़ी|

हम उसी गाय (cow) के बारे में बात कर रहे हो जो पिछले दो तीन सालो से टीवी चंनेलो पर इस तरह छाई रहती है जैसे अख्बरात और टीवी स्क्रीनों पर बाबावो, स्वमिवो और पंडितो के सेक्स स्कैंडल छाए होते है|

हम पेशे से हमेशा लोहा गरम देख कर हथोडा मारने के आदि है | मोदी हुकुमत में गाय (cow) की बढती हुई शोहरत और गौ रक्षको (cow vigilante) की हैवानियत का फैयदा उठाते हुए हम ने भी फैस्ला किया के एक किसि गाय (cow) का इंटरव्यू ले| तो फिर किया था हम ने भी एक गौशाला की तलाश में लग गए और फिर कैसे वैसे कर के एक गौशाला में पहोच ही गए जो दिखने में तो बिलकुल सरकारी गोडाउन की जैसा था जिस के दाखली दरवाजे पर लिखा था ‘गौमाता रख्षा सेवा मंडल गौशाला’ |

कच्ची दीवारों और तीन के छत के इस गौशाला में गिनती की आठ से दस गाये (cows) मौजूद थी | वो भी इस तरह बंधी हुई थी की उनकी हालतों के देख कर ऐसा लग रहा था जैसे अभी अभी वो कबर से निकले गए हो | सूखे बदन, पिचके हुए पेट और धंसी हुए आँखे जिन से पानी तरस रहा था जैसे वो अपनी किस्मत पर रो रही थी | इन गरीब बेवा नुमा गाय (cows) का जायजा लेते वक़्त हमारी नज़र एक खुबसूरत गाय (cow) पर पड़ी जो सफीद रंग में मलबूस,हरन जैसे काली आँखे और सुराही जैसे गर्दन की तरह अपनी नाज़ुक और कमज़ोर कमर को बल दे रही थी |

कब हम उसके करीब पहोंच गए हमें उसका अंदाज़ा भी नहीं हुआ क्युनके उसके अंदाज़े मस्ताना ने हमें दीवाना कर दिया था | हमें होश तो उस वक़्त आया जब उस गाय (cow) की खुबसूरत आवाज़ अर्ज़ करती है | आदाब अर्ज़ है जानब खैर्यत तो है | मै जब इधर उधर देखने लगा थो वो मुस्कुरा कर कहती है जनाब मै आपसे ही मुखातिब हु| और उसने कहा आप किसी उर्दू अख़बार के सहाफी लग रहे हो | उसके अंदाज़ तकल्लुम ने तो मेरे होश ही उडा दिए |

गाय की इस दूर अनदेशी पर हम उछल गए और पूछा मोहतरमा आपको कैसे पता चला की मई उर्दू अख़बार का सहाफी हु | गाय (cow) ने जवाब में कहा जनाब आप का किसी कम्युनिस्ट लीडर की तरह तना हुआ चेहरा और बे तरतीब ड्रेस और टूटे बटन, घिसे हुए जूतों के तलवे और बिखरे हुए बाल ये सबी निशानिय कियामत करीब की निसह्निया है मतलब उर्दू अख़बार के सहाफी की निशानिय है|

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हम ने कहा ये बात तो सही है की हम उर्दू अख़बार के सहाफी है लेकिन आप एक जानवर होते हुई भी इस कद्र शाहिस्ता गुफ्तुगू वो भी उर्दू जुबान में कैसे कर सकती हो | क्या आप उरदु जुबान पर उबुर रखती हो ? गाय (cow) ने जवाब में कहा की मई न सिर्फ उर्दू जुबान में उबुर रखती हु बल्कि मै उरदु जुबान के शायेरा (poet) भी हु और मेरा तखल्लुस है तड़प | और आपकी मालूमात में अज़ाफा करते चालू मै अकेले ही नै बल्कि मेरे वालिदैन का शुमार भी उर्दू के मशहुर शोएरा (poets) ते थे उनका का तखल्लुस था हड़प मेरी वालिदा संजीदा उन्वान पर लिखा करती थी उनका तखल्लुस था झड़प जो अब इस दुनिया में नहीं रहे | जो गौरक्षाको की महेरबानी और चारे पानी ना मिलने के कारण चल बसे|

फिर हमने उस गाय (cow) से इजाज़त तलब करी – क्या हम आपका इंटरव्यू ले सकते है? गाय (cow) का जवाब तो हा था लेकिम उसने कहा की मई अपने जवाब को कुछ अपने बेवजन शेर और कुछ को किसी अच्छे शायेर (poet) के बा-वज़न शेर के साथ दूंगी| हमने ने कहा कोई बात नहीं और पहला सवाल किया |

प्रशन: मोहतरमा मै आपके वालिदैन (parents) से तो वाकिफ होगया लेकिन, आपका जन्म कब और कहा हुआ ?
गाय (cow): मेरा जन्म शोला नगर में हुआ था जहा किसान बिस्पा निभम्बली का एक चार साला पोता खेत के खुले हुए कुए में डूब कर मर गया था |

तुम्हारा मज़हब क्या है ?

गाय (cow): हँसते हुए बोली ….. जनाब जानवरों का भी कोई मज़हब होता हो ? जानवर तो सिर्फ जानवर है वो इंसानों की तरह नहीं हिन्दू, मुस्लिम, सिख-ईसाई में बाते हुए है | लेकिन हा इन दिनों कुछ फिरका परस्त लोग ज़बरदस्ती गाय (cow) को हिन्दू बनाने पर तुले हुए है | गाय ने फिर कहा मै हिन्दू मज़हब की तकरीबन सभी किताबे पढ़ी है उनमे कही भी ये कही नहीं लिखा है की गाय (cow) का मज़हब हिन्दू है | में हिन्दू भाईयों से दरख्वास्त करती हु ….

गाय को हिन्दू बनाओ मत
जंग आलूद सीयासत को चमकाव मत

गौशाला तो काफी वसीह है लेकिन यहाँ बस आठ दस गाये (cows) क्यों नज़र आरही हैं?

गाय(cow): मुझे इस गौशाले में आये हुए १ साल हुआ है| मुझे यहाँ पर मौजूद एक गाय (cow) ने बताया की तीन साल पहले इस गौशाले का इफ्तितह हुआ था | जिस मे मुल्क के भगवा समाज के बड़े बड़े लीडर मौजूद थे| उस वक़्त मौजूद तकरीबन ४०० गाये की फूल पोशी भी की गई थी| | उस वक़्त एक बघवा लीडर ने कहा था की मोदी हुकूमत गाय (cow) की हिफाज़त के लिए भोत फ़िक्र मंद है | गाय (cow) हमारी माता है ओर जब माता को कांता चुभता है तो उसके दर्द का एहसास उसके बच्चो को भी होता है |

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जैसे जैसे वक़्त गुजरता गया गौरक्षको और गौशाले को देख रेख करने वाली की तेदाद भी कम होने लगी है| मुनासिब चारा पानी न मिलने की वजह से आधी से जयादा गाये (cow) रस्सी तोड़ कर भाग गई| जिन में रस्सी तोड़ने की ताक़त नै थी तो वो चारा और पानी न मिलने के कारण भूक से मर गई | मै गौरक्षको और गौशाला वालो से एक सवअल करती हू|

गायों को गौशालावो में पटकते हो क्यों
दयार गैर में मरने के लिए छोड़ते हो क्यों

गौशाला चलने वाले और गौशाला सेवा सोसाइटी को क्या हुकूमत मदद फ्राहम नै करती ?

हुकूमत गायो (cows) की हिफाज़त और उनके चारे पाने के लिए हर साल करोड़ रुपया खर्चा करती है | लेकिन ये रकम यहाँ आने से पहले ही ख़त्म हो जाती है | जब गाय (cow) गौशालाओ में भूक की वजा से मर जाती है तो उसकी वजा बीमारी बता दी जाती है | जबकी कितनी गायों की पोस्ट मोरतेम रिपोर्ट में उसकी वजा भूक बताई गई हैं|

मोदी के हुकूमत में आने के इन चार सालो में न जाने कितने मुस्लमान और दलित अफराद को मौत के घाट उतर दिया गया| आज अगर देखा जाए तो गाय (cow) मुसलमानों के लिए वबाल जन बनी हुई है |

शेर सामने आजाए भी तो कोई बात नहीं
गाय पीछे से भी गुज़र जाए तो डर लगता है

मोदी हुकूमत के कुछ लग गाय की हिफाज़त के नाम पर मुसलमानों में खौफ का माहोल पैदा करने की कोशिश कर रहे है | और बदकिस्मती से कुछ राज्य हुकूमते भी इन बदमाशो की हिमायत कर रही है | इस के बारे में गौमाता (cow) आपकी क्या राए है?

गाय (cow): जिस तरह हिन्दू लोगो ने गाय को अपने बाप की जागीर समज रखा है ठीक उसी तरह मुसलमानों/ दलितों ने भी गाय का घोषत खाना अपना पैदाइशी हक समज रखा है | इन घोषत खोट लोगो के लिए मेरे ये शेर आरा है |

मुस्लमान घोस्ट खाते रहे हुकूमत गवांते रहे
घंस फूस खाने वाले इक्तेदार संभालते रहे

जानवरों के ज़ुबह करने पर पाबन्दी की वजा से गरीब क़सयियो की रोज़ी रोटी खतरे में पढ़ गई है| हुकूमत ज़ुबह पर पाबन्दी क्यों नै लगाती और इस के लिओये कानून क्यों नै बनती? इस पर आपका क्या कहना है|
गाय (cow):  इस पर तो बोलने को बहोत कुछ है लेकिन मैं उसे एक ही शेर में समेटना चाहुगी|

बड़े बेव्परी स्लौटर हाउस चला कर ककरोड़ पति बन गए
बेचारे गरीब कसाई बे मोत मर गए

हमारे मुल्क के परधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी अपने आपको दुनिया का सब से काबिल और ताक़तवर परधानमंत्री समझते है इस पर आपके क्या कहना है ?

गाय(cow): इस सवाल का जवाब मई अज़ीम अमरोही के एक शेर इ देना चाहुगी

वो जिस को अपने क़द से कोई भी ऊँचा नहीं लगता
वो चाहे जितना खुश कद हो मुझे अच्छा नही लगता

तुम इतनी खुबसूरत और जाज़िब नज़र सरापे की मालिक होने के साथ साथ एक तालीम याफ्ता भी हो | क्या तुम्हे कभी बॉलीवुड में कम करने का ख्याल नहीं आया?

गाय (cow): कुछ महिना पहले इस गौशाले का मुतालिया करने सरकर की एक टीम आई थी | उसी टीम में एक फिल्म डायरेक्टर भी थे जब उसकी नज़र मेरे खुबसूरत बदन पर पढ़ी तो उस ने मुझे हीरोइन के रोल के लिए ऑफर किया था | लेकिन जब फिल्म के डायरेक्टर ने फिल्म की कहानी सुनाई तो पता चला की उस फिल्म में मेरे साथ एक कुत्ता भी अदाकारी करेगा | असल बात ये है की पूरी फिल्म में कुत्ता ही कुत्ता थी| और मेरा कम सिर्फ अपने चमकते हुए सफीद दांत और खुबसूरत जिस्म से सिर्फ कयामतधाना था | इसलिए में ने ऑफर ठुक्रदिया |

शोहरत के लिए उर्यां होना मंज्जूर न था

कुत्ते को बोसा देना मुझे गवारा ना था

मुस्लमान और हिन्दू भाई को कोई सन्देश देना चाहोगी …

गाय(cow): ये शेर ही मेरा सन्देश है |

 

घास खाती गाय को देवी मत बनाओ
फरबा गाय देख कर राल टपकाओ मत

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